Thursday, 1 September 2011

जिंदगी ,कुछ विचार

जिंदगी क्या है ,क्यों है , और इसका मतलब क्या है , कभी  सोचा है , ये हमे क्यों मिली , और हमने इसका क्या उपयोग किया ,कभी विचार करियेगा . जिंदगी की सार्थकता के बारे में सोचिये , क्या हमने अपनी हर बात में इमानदारी से व्यव्हार किया .अपने आपसे ये प्रश्न पूछते हुए भी डर लगता होगा , जिंदगी में रिश्ते होते है ,प्यार होता है , दोस्त होते है ,दुश्मन होते है , ,लोग रिश्तों में इमानदारी की बात करते है  तो इमानदारी क्या है अगर आपने अपने हर रिश्ते में अपनी सम्पूर्णता दी है तो क्या वो सब कुछ है, नहीं बिलकुल नहीं , कुछ चीज़े  दिल से निकलती है  और वो दिल से ही करने का मन करता है ,अगर आप परिवार वाले है तो अगर अपने अपने परिवार के लिए वो सब जो जरुरी है वो अगर किया है तो वो सार्थक है ,वही इमानदारी है,
पर क्या ये जरुरी है कि हर जगह ,हर बात पर सिर्फ आप अपने आदर्शो पर कायम रहे , और अपनी खुशिया अपने जज्बातों पर काबू रखे, जब तक आपकी वजह से किसी को कोई समस्या नहीं हो रहीहै तो आपको भी हक है थोड़ी उन्मुक्तता,  थोडा खुलापन अपने जीवन में , आज हम इकीसवीं सदी में जी रहे है, इसके साथ हमे अपनी सोच भी बदलनी होगी , जब आप अपनी जिंदगी में कंप्यूटर, मोबाइल फोन , इन सबका उपयोग शुरू कर सकते है ,इन्टरनेट पर web sites के मायाजाल में उलझ सकते है तो फिर अपने विचारों, अपने सोचने के ढंग में भी बदलाव लेन कि जरुरत है .
     बहुत सी बाते होती है जो आपको किसी के बारे में अच्छी लगाती है, और आप कहना भी चाहते है, पर आपकी भावनाओ को शब्दों का सहारा नहीं मिल पाता , और फिर बाद में आप सोचते रह जाते
है कि काश कह दिया होता, उसी तरह अगर आपको किसी के बारे में कोई चीज़ अच्छी नहीं लगती तो फिर वही बात.........
कुछ शब्द याद आते है जो मुझे sms से मिले थे " if u love some one , be brave to tell them otherwise be brave enough to watch them to be loved by someone else "
 आपको अपनी जज्बात, अपनी भावनाओ को शब्दों में परिवर्तित करने कि कला आनी चाहिए , फिर देखिएगा कि आपकी लेखनी कितने बेबाक हो जाती है , और आपके लेखन को एक नयी धार मिल जाती है,

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